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Theatre Play by HP Secretariat Recreation Art & Culture Club Shimla

Theatre Play by HP Secretariat Recreation Art & Culture Club Shimla

When

October 6, 2026    
5:30 pm - 7:30 pm

Where

Old Gothic Theater
Old Gothic Theater-Gaiety Heritage Cultural Complex Shimla, Shimla

Event Type

गेयटी थिएटर, शिमला में मोहन राकेश लिखित नाटक ‘आधे-अधूरे’ का प्रभावशाली मंचन
शिमला, 6 अक्टूबर 2026।

बारहमासा दिल्ली द्वारा आयोजित तृतीय श्याम दरिहरे रंग महोत्सव के अंतर्गत 5 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे ऐतिहासिक गेयटी थिएटर, शिमला में मोहन राकेश लिखित चर्चित नाटक ‘आधे-अधूरे’ का सफल एवं प्रभावशाली मंचन किया गया। यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं गेयटी थिएटर, शिमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। नाटक की प्रस्तुति शिमला एक्टिंग अकादमी, शिमला द्वारा की गई, जबकि नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन रुपेश भीमटा ने किया।
‘आधे-अधूरे’ हिंदी रंगमंच के महत्वपूर्ण नाटकों में शुमार है। मंचन के दौरान कलाकारों ने मध्यवर्गीय परिवार के भीतर मौजूद तनाव, असंतोष, टूटते रिश्तों, आर्थिक संघर्ष और भावनात्मक रिक्तता को प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। नाटक ने दर्शकों को परिवार और रिश्तों के उन पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित किया, जिनसे आधुनिक जीवन में व्यक्ति लगातार जूझता है। मोहन राकेश का ‘आधे-अधूरे’ एक मध्यमवर्गीय शहरी परिवार की कहानी है, जिसके केंद्र में सावित्री है। परिवार आर्थिक कठिनाइयों, आपसी तनाव, असंतोष और भावनात्मक दूरी से गुजर रहा है। सावित्री अपने पति महेंद्रनाथ को कमजोर, असफल और जीवन की जिम्मेदारियों को निभाने में अक्षम मानती है। परिवार की परिस्थितियों से असंतुष्ट सावित्री अपने जीवन में पूर्णता और स्थायित्व की तलाश करती है।
सावित्री के जीवन में आने वाले अलग-अलग पुरुष पात्र—सिंधानीया, जगमोहन और जुनेजा—बाहरी रूप से अलग दिखाई देते हैं, लेकिन नाटक धीरे-धीरे यह संकेत देता है कि उनमें भी वही कमियां और अधूरापन मौजूद है, जिससे सावित्री अपने पति में परेशान है। इस प्रकार नाटक केवल एक पति-पत्नी के संबंधों की कहानी नहीं रह जाता, बल्कि मनुष्य की उस निरंतर खोज को सामने लाता है जिसमें वह अपने जीवन में किसी ‘पूर्ण’ व्यक्ति या ‘पूर्ण’ संबंध की तलाश करता रहता है। परिवार के बच्चे बिन्नी, अशोक और किन्नी भी इस तनावपूर्ण वातावरण से प्रभावित होते हैं। माता-पिता के बीच लगातार चल रहे संघर्ष और असंतोष का असर उनके व्यक्तित्व और दृष्टिकोण पर दिखाई देता है। परिवार का प्रत्येक सदस्य किसी न किसी स्तर पर अधूरापन, असुरक्षा और असंतोष से जूझ रहा है।
नाटक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें ‘अधूरापन’ केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है। सावित्री, महेंद्रनाथ और उनके आसपास के सभी पात्र अपने-अपने तरीके से अधूरे हैं। यही कारण है कि ‘आधे-अधूरे’ केवल एक पारिवारिक कहानी न होकर आधुनिक मध्यमवर्गीय जीवन, रिश्तों और मनुष्य की मानसिक स्थिति का गहरा चित्रण बन जाता है।
नाटक के माध्यम से मोहन राकेश ने यह सवाल उठाया है कि क्या मनुष्य वास्तव में किसी दूसरे व्यक्ति में अपनी पूर्णता खोज सकता है, या फिर उसके भीतर का अधूरापन जीवनभर उसके साथ बना रहता है।
प्रमुख पात्र एवं कलाकार
1. सावित्री (मुख्य स्त्री पात्र) — कृतिका शर्मा
2. महेंद्रनाथ, सिंधानीया, जगमोहन एवं काले सूट वाला व्यक्ति — रुपेश भीमटा
3. बिन्नी (बड़ी बेटी) — प्रीती ठाकुर
4. अशोक (बेटा) — अभिषेक वर्मा
5. किन्नी (छोटी बेटी) — यक्षीता
6. जुनेजा (महेंद्रनाथ का मित्र) — आदर्श चौहान
बैकस्टेज टीम
• लेखक: मोहन राकेश
• परिकल्पना एवं निर्देशन: रुपेश भीमटा
• सह-निर्देशक: अभिषेक वर्मा
• मंच व्यवस्थापक: विकास गौतम
• संगीत: रोहित कंवल / लक्की
• प्रकाश: केदार ठाकुर
• वस्त्र विन्यास: संजना चौहान / कृतिका शर्मा
नाटक की प्रस्तुति के दौरान कलाकारों के सधे हुए अभिनय, संवाद अदायगी, प्रकाश व्यवस्था, संगीत और मंच संयोजन ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। दर्शकों ने नाटक की विषयवस्तु और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।
‘आधे-अधूरे’ का यह मंचन तृतीय श्याम दरिहरे रंग महोत्सव में हिंदी रंगमंच की समृद्ध परंपरा और समकालीन सामाजिक सरोकारों को प्रस्तुत करने वाली एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति के रूप में याद किया जाएगा।

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